पैराबोलिक सैटेलाइट एंटीना आने वाली रेडियो तरंगों को परावर्तक से फीड तक पहुँचाता है। प्राप्ति के लिए LNB कमजोर संकेत को बढ़ाता है और कम आवृत्ति में बदलता है; रिसीवर उससे कार्यक्रम या डेटा निकालता है। डिश का एकत्रण, LNB का प्रवर्धन और आवृत्ति परिवर्तन, तथा रिसीवर का डिमॉड्यूलेशन अलग काम हैं।
डिश तरंगों को कैसे एकत्र करती है
एंटीना के आकार की तुलना में उपग्रह बहुत दूर होता है, इसलिए स्थानीय स्तर पर आने वाला तरंगमुख लगभग समतल माना जा सकता है। आदर्श पैराबोलिक सतह अपनी धुरी के समानांतर आने वाली तरंगों को फोकस के पास एकत्र करती है।
वहाँ रखा फीड हॉर्न या अन्य फीड संकेत को प्राप्ति पथ से जोड़ता है। परावर्तक स्वयं अतिरिक्त विद्युत शक्ति पैदा नहीं करता; वह बड़ी अपर्चर से ऊर्जा एकत्र करता और एक दिशा में उच्च गेन देता है।
ऑफसेट डिश में फीड द्वारा अपर्चर का अवरोध कम किया जा सकता है। दिखाई देने वाली डिश का झुकाव हमेशा वास्तविक बीम दिशा के बराबर नहीं होता।
संकेत से तस्वीर या डेटा तक
- परावर्तक लक्ष्य दिशा की तरंगों को फीड पर एकत्र करता है।
- फीड रेडियो पथ और ध्रुवण से संबंधित भूमिका निभाता है।
- लो-नॉइज़ एम्प्लीफायर कम अतिरिक्त शोर के साथ संकेत बढ़ाता है।
- आवृत्ति परिवर्तक उसे उपयुक्त मध्यवर्ती आवृत्ति में बदलता है।
- रिसीवर चैनल चयन, डिमॉड्यूलेशन, त्रुटि सुधार और डिकोडिंग करता है।
घरेलू सैटेलाइट टीवी में LNB का अर्थ सामान्यतः Low-Noise Block downconverter है। सभी उपग्रह टर्मिनलों में समान LNB, नियंत्रण या मध्यवर्ती आवृत्ति नहीं होती।
LNB आवृत्ति क्यों बदलता है
ऊँची RF आवृत्ति को लंबे घरेलू केबल से सीधे भेजने के बजाय उसे कम आवृत्ति में बदलना केबल की हानि और रिसीवर की आवश्यकताओं के लिए उपयोगी होता है। सरल डाउनकन्वर्ज़न में fIF = |fRF − fLO| होता है।
यदि RF = 11.20 GHz और स्थानीय दोलक LO = 9.75 GHz हो, तो IF = 1.45 GHz, यानी 1450 MHz होगा। यह गणना का उदाहरण है; वास्तविक LO और बैंड LNB तथा रिसीवर के अनुसार चुनें।
कुछ Ku LNB में वोल्टेज और टोन से नियंत्रण होता है, लेकिन उसी व्यवस्था को हर देश और हर टर्मिनल का नियम न मानें। गलत सेटिंग होने पर मजबूत संकेत के बावजूद सही चैनल नहीं मिल सकता।
डिश का आकार और गेन
गोल अपर्चर के लिए अनुमानित गेन G ≈ η(πD/λ)² है। D व्यास, λ तरंगदैर्ध्य और η अपर्चर दक्षता है। समान आवृत्ति तथा दक्षता पर व्यास दोगुना करने से रैखिक गेन चार गुना, लगभग 6 dB बढ़ता है।
D = 0.60 m, f = 12 GHz और η = 0.60 मानने पर लगभग 35.3 dBi मिलता है। इन्हीं आवृत्ति और दक्षता पर 3 m व्यास लगभग 49.3 dBi देता है, न कि सभी Ku स्थितियों में निश्चित 40 dBi। ये उदाहरण हैं, उत्पाद के माप नहीं।
बड़ी डिश का बीम सामान्यतः संकरा होता है। उपयोगी प्राप्ति में कवरेज, शोर, वर्षा, ध्रुवण और दिशा का मार्जिन भी शामिल है।
कमजोर शक्ति की इकाइयाँ
1 nW = 10−9 W और 1 pW = 10−12 W हैं। दोनों में हजार गुना अंतर है। सभी उपग्रह संकेत पृथ्वी पर एक ही शक्ति से नहीं पहुँचते।
प्राप्त शक्ति के लिए प्रेषक, दोनों एंटीना, दूरी और हानियों का बजट चाहिए। केवल कक्षा की ऊँचाई से अंतिम रिसीवर स्तर नहीं निकलता।
अज़िमुथ, एलिवेशन और ध्रुवण
अज़िमुथ क्षैतिज दिशा और एलिवेशन क्षितिज से ऊँचाई का कोण है। वे स्थान और उपग्रह पर निर्भर हैं। कंपास के चुंबकीय उत्तर और गणना के वास्तविक उत्तर को अलग रखें।
रैखिक ध्रुवण में फीड या LNB का घुमाव महत्वपूर्ण हो सकता है। पेड़ और इमारतें रास्ता रोक सकते हैं। हर डिश के लिए 0.1° की सार्वभौमिक सहनशीलता नहीं होती।
केवल संकेत की शक्ति अधिक होना सही उपग्रह मिलने का प्रमाण नहीं है। लक्षित संकेत का लॉक, गुणवत्ता और त्रुटियाँ भी जाँचें।
सभी एंटीना स्थिर डिश नहीं हैं
GEO के लिए स्थिर टर्मिनल लगभग एक दिशा देखता है। LEO उपग्रह आकाश में चलते दिखाई देते हैं, इसलिए टर्मिनल यांत्रिक ट्रैकिंग या इलेक्ट्रॉनिक बीम स्टीयरिंग इस्तेमाल कर सकता है।
फेज़्ड-एरे पैनल कई तत्वों की सापेक्ष फेज़ से बीम बनाता है और उसे पैराबोलिक परावर्तक की आवश्यकता नहीं होती। बाहरी आकार अकेले पूरी कार्यप्रणाली नहीं बताता।
क्या टीवी डिश डेटा वापस भेजती है
प्राप्ति-मात्र टीवी व्यवस्था और दोतरफा इंटरनेट टर्मिनल अलग हैं। दोतरफा व्यवस्था में उपयुक्त प्रेषण पथ, मॉडेम और सेवा चाहिए। टीवी LNB से राउटर जोड़ देना अपने आप अपलिंक नहीं बनाता।
पैराबोलिक परावर्तक के सिद्धांत और Dolph Microwave SATCOM एंटीना देखते समय आवृत्ति, प्राप्ति या प्रेषण, ध्रुवण, अपर्चर और स्थापना की शर्तें साथ रखें।