लंबी दूरी के लिए एंटीना चुनते समय आवृत्ति, सेवा और तरंग के प्रसार का रास्ता पहले तय करें। माइक्रोवेव लिंक में पैराबोलिक डिश, कुछ VHF/UHF लिंक में यागी या पैनल और HF में डाइपोल या अन्य ऐरे उपयोगी हो सकते हैं। हर परिस्थिति में सबसे अधिक दूरी देने वाला एक ही प्रकार नहीं है।
पहले संकेत का रास्ता समझें
स्थलीय माइक्रोवेव लिंक में सीधी दृश्य रेखा और फ्रेनेल क्षेत्र की निकासी महत्वपूर्ण हो सकती है। HF में आयनमंडल, दिन का समय, आवृत्ति और सौर गतिविधि असर डालते हैं। उपग्रह लिंक में कक्षा, उन्नयन कोण और ट्रैकिंग देखें।
केवल अधिक dBi चुनने से सही दिशा में उपयोगी संकेत नहीं मिलता। संकीर्ण बीम गलत दिशा में हो तो अच्छे एंटीना का लाभ भी नहीं मिल पाएगा।
पैराबोलिक डिश कब उपयोगी है
परावर्तक और उपयुक्त फीड मिलकर दिशात्मक अपर्चर बनाते हैं। व्यास, तरंगदैर्ध्य, सतह और अपर्चर दक्षता गेन तथा बीम को प्रभावित करते हैं। इसी कारण स्थिर माइक्रोवेव और कुछ उपग्रह लिंक में डिश उपयोगी है।
हर डिश का गेन 30–40 dBi या बीम चौड़ाई 1–2° नहीं होती। बड़े अपर्चर के लिए मजबूत आधार और सटीक पॉइंटिंग की आवश्यकता बढ़ सकती है। 0.1° की सीमा भी सभी मॉडलों के लिए समान नहीं है।
यागी, पैनल और VHF/UHF
निश्चित दिशा के लिए सही बैंड की यागी या पैनल लिंक बजट में मदद कर सकती है। आवृत्ति, ध्रुवण, पैटर्न और केबल हानि को साथ देखें। दिशात्मक एंटीना कुछ अनचाही दिशाओं से आने वाले हस्तक्षेप की प्रतिक्रिया कम कर सकता है।
स्थलीय टीवी और FM के लिए स्थानीय आवृत्तियां तथा रिसीवर की संगतता जरूरी हैं। Ku-बैंड की डिश में एडाप्टर लगाने से वह हर स्थलीय टीवी सेवा के लिए उपयुक्त नहीं बनती।
HF में ऊंचाई और विकिरण कोण
HF में डाइपोल, वर्टिकल, लूप और ऐरे उपयोग किए जाते हैं। तरंगदैर्ध्य के अनुपात में ऊंचाई, जमीन और एंटीना की बनावट उपयोगी उन्नयन कोण बदलते हैं। आयनमंडलीय मार्ग साधारण लाइन-ऑफ-साइट मार्ग जैसा नहीं है।
20-मीटर बैंड का नाम, तार की कुल लंबाई और वास्तविक तरंगदैर्ध्य अलग बातें हैं। किसी डाइपोल और 100 W से हर समय 1,000–4,000 km की विश्वसनीय सेवा का वादा नहीं किया जा सकता।
ट्यूनर अपनी जगह पर प्रतिबाधा मिलाने में मदद करता है; वह अनुपयुक्त आवृत्ति पर उपयुक्त आयनमंडलीय रास्ता नहीं बनाता।
2.4 GHz की लंबी दूरी वाली कड़ी
दो निश्चित स्थानों के बीच संगत दिशात्मक पैनल या ग्रिड/डिश उपयोगी हो सकती है। दोनों रेडियो, चैनल, ध्रुवण, केबल और अनुमति प्राप्त संचालन की जांच करें। केवल एक तरफ मजबूत प्रसारण पर्याप्त नहीं है; वापसी वाला रास्ता भी काम करना चाहिए।
सर्वदिशीय एंटीना कई क्षैतिज दिशाओं में सेवा दे सकती है, लेकिन इसका अर्थ ऊपर और नीचे हर दिशा में एक जैसी प्रतिक्रिया नहीं है। संकीर्ण ऊर्ध्वाधर पैटर्न पास के कुछ बिंदुओं को कम कवर कर सकता है।
दूरी बताने से पहले लिंक बजट
प्रेषित शक्ति, दोनों सिरों का गेन, केबल हानि, रास्ता, शोर और आवश्यक रिसीवर संवेदनशीलता लिखें। आदर्श मुक्त स्थान में दूरी दोगुनी करने पर लगभग 6 dB अतिरिक्त पथ हानि होती है।
बाकी आदर्श शर्तें समान हों तो एक सिरे पर 3 dB गेन वृद्धि लगभग √2 गुना दूरी के अनुरूप है, दोगुनी दूरी के नहीं। वास्तविक भवन, वर्षा, फेडिंग और हस्तक्षेप इस सरल अनुमान को बदल सकते हैं।
SWR और दूर क्षेत्र का अर्थ
कम SWR पोर्ट पर कम परावर्तन का संकेत है, लेकिन यह सही दिशा में उच्च दक्षता या पर्याप्त लिंक मार्जिन का प्रमाण नहीं है। हानिपूर्ण नेटवर्क भी अच्छा SWR दिखा सकता है।
दूर क्षेत्र या far field मापन और पैटर्न से जुड़ी क्षेत्र-परिभाषा है, अधिकतम संचार दूरी नहीं। बड़े अपर्चर के लिए लगभग 2D²/λ एक प्रचलित दूरी मानदंड है, जिसके साथ बाकी मापन शर्तें भी देखी जाती हैं।
वास्तविक सेवा का परीक्षण
अलग समय और चैनलों पर गुणवत्ता, त्रुटि और स्थिरता दर्ज करें। एक बार दूर की स्टेशन सुनाई देने से स्थायी उपलब्धता सिद्ध नहीं होती। एम्प्लीफायर बाद की कुछ हानि का प्रभाव घटा सकता है, लेकिन अनुपस्थित उपयोगी संकेत वापस नहीं बना सकता।
फ्रिस संबंध और एंटीना गेन की परिभाषा लिंक की शर्तें समझने में मदद करते हैं। एंटीना का चुनाव सेवा और मापन से करें, केवल विज्ञापन में लिखे किलोमीटर से नहीं।