माइक्रोवेव में पैराबोलिक डिश उपयोगी है क्योंकि वह उच्च गेन, संकीर्ण बीम और अपेक्षाकृत छोटे फीड के साथ बड़ा अपर्चर दे सकती है। वह हर प्रणाली के लिए सर्वोत्तम नहीं है: पॉइंटिंग, सतह, हवा और फीड बैंड सीमाएँ लगाते हैं। उसे चुनने के पाँच तकनीकी कारण नीचे हैं।
1. तरंगदैर्घ्य की तुलना में बड़ा अपर्चर
वृत्ताकार रिफ्लेक्टर के लिए G ≈ η(πD/λ)² है, जहाँ D व्यास और η अपर्चर दक्षता है। इससे स्पष्ट होता है कि व्यावहारिक आकार की डिश माइक्रोवेव पर उच्च गेन क्यों दे सकती है।
D = 1.2 m, f = 12 GHz और η = 0.60 मानने पर लगभग 41.4 dBi मिलते हैं। यह मानी गई दक्षता वाला उदाहरण है, हर 1.2 m डिश की गारंटी नहीं।
स्थिर आवृत्ति और दक्षता पर व्यास दोगुना करने से गेन लगभग 6 dB बढ़ता है। पूरे लिंक में हमेशा इतना ही लाभ नहीं होगा, क्योंकि पॉइंटिंग, इल्यूमिनेशन और हानियाँ भी बदल सकती हैं।
2. चुनी हुई दिशा के लिए संकीर्ण बीम
बीम की चौड़ाई आम तौर पर λ/D के साथ घटती है; गुणांक अपर्चर के इल्यूमिनेशन पर निर्भर है। यह बिंदु-से-बिंदु लिंक और निश्चित दिशा से रिसेप्शन में उपयोगी है।
इस दिशिकता का मतलब सार्वभौमिक फ्रंट-टू-बैक अनुपात 60 dB से अधिक नहीं है। साइड लोब, जमीन और पास की संरचनाएँ हस्तक्षेप बदलते हैं। संकीर्ण बीम को स्थिर माउंट और सही पॉइंटिंग भी चाहिए।
3. रिफ्लेक्टर से संग्रह और कोलिमेशन
पैराबोलिक ज्यामिति आगमन की एक दिशा को फोकल क्षेत्र से जोड़ती है। ट्रांसमिशन में फीड और रिफ्लेक्टर साथ बीम बनाते हैं। जिन सामग्री और परिस्थितियों में पारस्परिकता लागू होती है, उनमें रिसेप्शन का संबंधित रास्ता भी काम करता है।
फीड का फेज सेंटर डिजाइन के अनुसार रखें। फोकल लंबाई का व्यास से अनुपात हर डिश में 0.4–0.5 नहीं होता। ऑफसेट ज्यामिति में डिस्क का दिखने वाला झुकाव वास्तविक RF दिशा समझने में भ्रम पैदा कर सकता है।
4. अलग बैंड और पोलराइजेशन के साथ उपयोग
रिफ्लेक्टर एक अकेला रेजोनेंट तार नहीं है। यदि सतह, इल्यूमिनेशन और फीड उपयुक्त रहें तो वह व्यापक बैंड में उपयोगी हो सकता है। वास्तविक बैंड फीड, पोलराइजर और जुड़े घटकों से सीमित हो सकता है।
इसलिए 40% आंशिक बैंडविड्थ सभी उत्पादों का साझा गुण नहीं है। कई बैंड भेजने या पाने के लिए हर पथ का पैटर्न, फेज और पोलराइजेशन जाँचें।
5. बड़ा अपर्चर और RF भाग अलग रखना
कई RF कार्य फीड क्षेत्र में रखे जा सकते हैं जबकि बड़ा परावर्तक निष्क्रिय रहता है। कुछ अनुप्रयोगों में यह लागत, प्रदर्शन और रखरखाव का उपयोगी संतुलन देता है।
स्वीकार्य शक्ति फीड, खिड़कियों, ट्रांजिशन और कनेक्टर पर भी निर्भर है। धातु की डिश पूरी प्रणाली को अपने आप किलोवाट-क्षमता नहीं देती। केवल रिसेप्शन वाली टीवी डिश स्वतः ट्रांसमिटिंग टर्मिनल नहीं है।
सतह की सटीकता और बाहरी स्थितियाँ
छोटे तरंगदैर्घ्य पर वही विकृति अधिक महत्वपूर्ण होती है। गॉसियन वितरण वाली यादृच्छिक त्रुटियों और NRAO में वर्णित Ruze मॉडल की शर्तों में कमी का गुणक लगभग exp[−(4πσ/λ)²] है, जहाँ σ सतह त्रुटि का RMS है।
12 GHz पर λ लगभग 25 mm और σ = 0.5 mm लेने से गुणक लगभग 0.939, यानी उसी अपर्चर के त्रुटिरहित संदर्भ से लगभग 0.27 dB हानि मिलती है। यह कुल दक्षता नहीं है और हर प्रकार की विकृति को नहीं बताता।
बर्फ और हिम भार तथा प्रदर्शन बदल सकते हैं। हीटिंग हो तो वह उसी रिफ्लेक्टर के लिए डिजाइन किया गया हो। मनमाना गर्म करना सतह, कोटिंग या फीड विकृत कर सकता है। गर्म करना और गेन बढ़ाना समान बात नहीं हैं।
दूसरी संरचना कब चुनें
व्यापक कवरेज, बहुत छोटी जगह या तेज इलेक्ट्रॉनिक स्कैन के लिए अन्य संरचना बेहतर हो सकती है। ऑम्निडायरेक्शनल, हॉर्न और ऐरे अलग आवश्यकताएँ पूरी करते हैं; तुलना पूरे लिंक पर करें।
रिफ्लेक्टर के सिद्धांत और गेन की परिभाषा देखें। दूरी का दावा करने से पहले आवृत्ति, व्यास, दक्षता, पॉइंटिंग और वातावरण तय करें।